Suresh Oberoi Reveals How He Got His First National Film Award: पिछले चार दशकों से हिंदी सिनेमा को कई बेहतरीन फिल्म देने वाले अभिनेता सुरेश ओबेरॉय की पहचान एक चरित्र अभिनेता के तौर पर है। हालाकि शुरूआती दौर में सुरेश ओबेरॉय ने कुछ रोमांटिक फिल्मों में लीड रोल किया था। जिसमें ऐतबार,तुम्हारे बिना जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों के हिट होने के बावजूद अभिनेता ने हीरो की बजाए चरित्र भूमिकाओं को करना पसंद किया और सहायक किरदारों के जरिए अपनी पहचान बनाई। कई फिल्मों में सुरेश ओबेरॉय ने विलेन का रोल भी निभाया। जिसे लोगों ने पसंद भी किया। 1985 में ऐसे ही एक फिल्म मिर्च मसाला रिलीज हुई थी। जिसमें लीड रोल स्मिता पाटिल और नसीरूद्दीन शाह ने निभाया था। बावजूद इसके सुरेश ओबेरॉय ने अपनी दमदार एक्टिंग के दम पर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता था।
लहरें रेट्रो से की गई बातचीत में अभिनेता ने बताया कि उस समय राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का दायरा सीमित था। सिर्फ कुछ मेन स्ट्रीम में ही एक पुरस्कार दिया जाता था। 1986 में जब इस पुरस्कार का ऐलान होना था। तब इसके लिए मुझे चुना गया था। लेकिन मैं तो फिल्म में लीड हीरो नहीं था। लीड हीरो फिल्म की असल में स्मिता पाटिल थी। जिनके ऊपर ये फिल्म बनी थी। ऐसे में ये पुरस्कार मुझे मिलना था। इसलिए उस समय भारत सरकार ने एक नई कैटगरी सहायक अभिनेता को इसमें शामिल किया और फिर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मुझे दिया गया। जब इसकी घोषणा हुई और मुझे फोन आया, फिर मैंने रेडियो पर भी सुना, तो मैं रोने लगा। मैं कुछ बोल ही नहीं पा रहा था।
बता दें कि उस साल इस फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ निर्देशन और सर्वश्रेष्ठ एडिटिंग का भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता था। फिर 1987 में मॉस्को में हुए 15वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल में इस फिल्म ने गोल्डन प्राइज पुरस्कार दिया गया था। अभिनेता सुरेश ओबेरॉय ने सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ कई फिल्में की हैं। कुछ को सुरेश ओबेरॉय के साथ काम करने में दिक्कत होती थी लेकिन मिथुन चक्रवर्ती और जीतेंद्र को सुरेश ओबेरॉय के साथ काम करने में कभी भी कोई दिक्कत नहीं हुई और ज्यादातर फिल्म अभिनेता ने इन्ही दो हीरो के साथ की हैं।
अभिनेता ने हाल ही में अपना 77वां जन्मदिन सेलीब्रेट किया है। वो इस उम्र में भी काफी फिट हैं। अपनी फिटनेस को लेकर सुरेश ओबेरॉय का कहना है कि उन्होने शुरू से ही इस पर काफी मेहनत किया है और खाली समय में वो कराटे वगैर सीखा करते थे। अब उम्र के इस पड़ाव पर उनके फिट रहने का सबसे बड़ा मंत्र आध्यात्म है। मेडिटेशन के जरिए वो अपने आपको हेल्दी रखते हैं।

