Suresh Oberoi Reacts To His Romantic Movie Aitbaar: फिल्म अभिनेता सुरेश ओबेरॉय ने अपने फिल्म करियर की शुरूआत 70 के दशक में की थी। हालाकि इससे पहले वो रेडियो शोज,नाटक व विज्ञापनों में नजर आ चुके थे। 1977 में सुरेश ओबेरॉय की फिल्म जीवन मुक्त रिलीज हुई। इसके बाद मिथुन चक्रवर्ती के साथ सुरक्षा और फिर अमिताभ बच्चन के साथ काला पत्थर आई। इन फिल्मों में सुरेश ओबेरॉय ने पुलिस या फिर नेवी ऑफिसर का रोल निभाया था। 80 के दशक में आते आते सुरेश ओबेरॉय फिल्मों में चरित्र के साथ ही साथ विलेन के रोल भी करने शुरू कर दिए थे। लहरें रेट्रो के साथ बातचीत में सुरेश ओबेरॉय ने कहा कि उन्हे परिवार के पालन पोषण के लिए विलेन व चरित्र किरदार करने पड़े थे।
इसी कड़ी में सुरेश ओबेरॉय की विलेन की भूमिका वाली फिल्म श्रध्दांजलि 1981 में और इससे पहले एक बार फिर फिल्म रिलीज हुई थी। इन दोनों ही फिल्मों में सुरेश ओबेरॉय की निगेटिव भूमिका थी और इससे उनकी इमेज एक विलेन के तौर पर बन गई थी। श्रध्दांजलि और एक बार फिर के बाद कोई भी हीरोइन सुरेश ओबेरॉय के साथ काम करने को तैयार नहीं थी। अभिनेता ने वरिष्ठ पत्रकार भारती एस प्रधान के साथ बातचीत में कहा कि उस वक्त हीरोइन्स के सेक्रेटरी फिल्मों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते थे। वो हीरो की इमेज को ध्यान में रखकर ही फिल्में साइन करते थे। अगर बाहर किसी हीरो की इमेज विलेन वाली है। तो उस हीरो के साथ किसी हीरोइन का काम करना मुश्किल हो जाता था।
अभिनेता ने आगे कहा कि शायद इसीलिए श्रध्दांजलि के बाद कोई भी एक्ट्रेस उनके साथ काम करने को राजी नहीं थी। एक्ट्रेस को डर था कि मेरे साथ काम करने से उनकी इमेज भी खराब हो जाएगी। एक बार फिर में भी उन्होने एक बिगडैल सुपरस्टार का रोल निभाया था। फिर एक वक्त ऐसा भी आया कि सुरेश ओबेरॉय के पास काम नहीं था। तब वो रेडियो या फिर विज्ञापनों में काम कर लिया करते थे। खाली समय में सुरेश ओबेरॉय अपने फिटनेस पर भी ध्यान दिया करते थे और घंटों ताइक्वांडो व कराटे वगैर सीखा करते थे। शायद इसीलिए सुरेश ओबेरॉय 77 साल की इस उम्र में भी इतने फिट हैं।
फिर मुश्किल वक्त में मुकुल आनंद ने उन्हे ऐतबार ऑफर की। उन्हे पता चला कि डिंपल कपाडिया इस फिल्म में काम कर रही हैं। ऐतबार एक रोमांटिक फिल्म थी। लोगों ने इस फिल्म को स्वीकार किया और फिल्म बड़ी हिट साबित हुई। इस फिल्म के गाने आज भी सुने जाते हैं। ऐतबार के अलावा कई और रोमांटिक फिल्मों में काम किया है पर वो ज्यादा वर्क नहीं कर पाई थी और फिर चरित्र किरदारों के जरिए ही अभिनेता ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई। क्योकि हीरो की एक फिल्म फ्लॉप होने पर साल साल भर काम नहीं मिलता था। इसलिए परिवार को चलाना मुश्किल था। शायद इसी वजह से सुरेश ओबेरॉय ने चरित्र किरदारों को अपनाया।
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