Suresh Oberoi Opens Up About His Anger Issues: हिंदी सिनेमा में 70 के दशक से अपने करियर की शुरूआत करने वाले सुरेश ओबेरॉय ने हाल ही में अपना 77वां जन्मदिन सेलीब्रेट किया है। इस मौके पर उन्होने लहरें रेट्रो को एक खास इंटरव्यू दिया है। जिसमें एक्टर ने अपने गुस्से को लेकर विस्तार से बातें की हैं। एक्टर ने इस मौके पर ये भी बताया है कि उन्होने किस तरह से अपने गुस्से पर काबू पाया है।
लहरें रेट्रो के लिए वरिष्ठ पत्रकार भारती एस प्रधान से बातचीत में जब एक्टर से उनके एंगर को लेकर पहला ही सवाल पूछा गया। तब एक्टर ने कहा कि उन्होने अपने घर में एंगर जोन बनाया है। इतना ही नहीं पोते व पोतियों के लिए नो इंग्लिश जोन भी बनाया है और सभी से कहा कि घर में कोई भी इंग्लिश में बात नहीं करेगा। फिर भी बच्चे इसके लिए लड़ते हैं और कहते हैं दादा जी देखों इसने इंग्रेजी में बात की है। फिर वो हंसने लगते हैं। एक्टर के जवाब पर भारती एस प्रधान भी सरप्राइज थी कि एंगर जोन तो ठीक है लेकिन नो इंग्लिश जोन हमने पहली बार सुना है।
इस पर अभिनेता ने जवाब देते हुए कहा कि हम रिलायंस के एक प्रोग्राम में गए हुए थे। वहां हमारे कहने पर उन्होने नो एंगर जोन की स्थापना की। फिर भारती जी ने सवाल किया कि आपने अपने एंगर पर काबू कैसे पाया। इस पर एक्टर ने कहा कि उन्होने एंगर पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया है, पर हां कोशिशे बहुत की हैं। उन्होने इस पर काबू पाने के लिए आध्यात्म का सहारा लिया है। जो बेहद ही कारगर साबित हुआ है। इस सिलसिले में उनका ब्रह्मकुमारीज के साथ जुड़ना काफी फायदेमंद साबित हुआ। इससे उन्हे सकारात्मक ऊर्जा मिली।
इस बातचीत में अभिनेता ने ब्रह्मकुमारीज के साथ अपने जुड़ाव व बाॉन्डिंग के बारे में विस्तार से बातें की और ये भी बताया कि कैसे उनकी वजह से बेटे विवेक ओबेरॉय का रिश्ता लगा। लहरे रेट्रो से बातचीत में अभिनेता ने अपने राजनीतिक और बीजेपी व आरएसएस से जुड़ाव पर भी विस्तार से बातें की और कहा कि पिता जी के जमाने से ही वो संघ से जुड़े थे और वो बीजेपी के बाकायदा सक्रिय सदस्य हैं। बेटे विवेक ओबेराय की पीएम मोदी पर बनी बायोपिक में शानदार अभिनय के लिए तारीफ भी की और कहा कि उनके इसके लिए बहुत मेहनत की थी पर फिल्म नहीं चल पाई।

