Saira Banu ने बताया कि उनकी और Dilip Kumar की प्रेम कहानी की शुरुआत कैसे हुई, बोलीं वो मुझे तबसे जानते थे जब मैं एक छोटी बच्ची थी?

Saira Banu on how her  Dilip Kumar love story started: बॉलीवुड की वर्सेटाइल अभिनेत्री सायरा बानू जोकि अक्सर सोशल मीडिया पर अपने फैंस से रूबरू होने के लिए कुछ न कुछ पोस्ट्स करती रहती हैं। इसी बीच सायरा ने अपने जन्मिदन पर एक पोस्ट साझा करके बताया है कि उनकी और दिलीप कुमार की प्रेम कहानी की शुरुआत कैसे हुई। 

सायरा बानू  ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से अपने जन्मदिन की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि, ‘’जहाँ तक मुझे याद है, जन्मदिन मेरे लिए बहुत “विशेष” रहे हैं — मेरी माँ परी चेहरा नसीम बानूजी मुझे हमेशा अपने दोस्तों के साथ सबसे अच्छा मज़ेदार समय देने के लिए दुनिया के अंतिम छोर तक गईं, चाहे यहाँ मुंबई में या लंदन में। स्कूल– एक बार एक ऊंची परत वाला केक नहीं भूलना चाहिए जिसने “कुतुब मीनार” को शर्मसार कर दिया होगा!’’

सायरा ने आगे लिखा  कि, ‘’हम एक बहुत ही घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए छोटे परिवार थे जो एक-दूसरे पर स्नेह करते हुए रहते थे — मेरी दादी, मेरी दादी-चाची, मेरी माँ और मेरा प्रिय भाई सुल्तान। फिर हे प्रेस्टो! क्या सौभाग्य है! जैसे ही मैंने अपना लंदन स्कूल पूरा किया और बंबई घर वापस आई, मुझे सुपर हिट ईस्टमैन कलर फिल्म “जंगली” करने का मौका मिला, जो उस समय की लोकप्रियता बन गई। अब तक ब्लैक एंड व्हाइट फिल्में ही चलन में थीं और उनका बोलबाला था।जल्द ही जीवन रोशनी और खुशी का विस्फोट बन गया और जन्मदिन जैसे अवसर प्रशंसा, फूलों, दोस्तों और प्रशंसकों के संदेशों की बाढ़ में बदल गए, जिससे पूरा घर “ईडन के बगीचे” में बदल गया।’’

इसी पोस्ट में सायरा ने आगे लिखा कि, ‘’23 अगस्त, 1966 को ऐसी ही एक अच्छी शाम थी, 34-बी पाली हिल में हमारे नए निवास का गृह प्रवेश चल रहा था, घर जानबूझकर और बिल्कुल दिलीप साहब के ‘डर के सामने’ (घर के सामने) जैसा बनाया गया था। वह मद्रास में शूटिंग कर रहे थे और मेरी मां के निमंत्रण पर मेरे जन्मदिन में शामिल होने के लिए शहर आये।’’

अंत में सायरा ने दिलीप साहब के साथ अपनी लव-स्टोरी के बारे में बताते हुए कहा कि, ‘’जीवन सौभाग्य से घिर गया, एक के बाद एक चमत्कार और क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि “अभिनय का सम्राट” जिसके लिए दुनिया उसका मंच थी। श्री दिलीप कुमार, जो मुझे तब से जानते थे जब मैं एक छोटी लड़की थी और इसलिए उन्होंने मेरे साथ काम करने से इनकार कर दिया था, लेकिन इस हाउस वार्मिंग पार्टी में मुझसे मिलने के तुरंत बाद उन्होंने कहा, “तुम बड़ी होकर एक खूबसूरत लड़की बन गई हो!” अगले कुछ दिनों में उन्होंने हर दूसरी रात मद्रास से बंबई तक तूफानी उड़ानों में यात्रा की और मेरे साथ रात्रिभोज किया। इन जादुई शामों में से एक में उन्होंने सवाल उठाया “क्या तुम मुझसे शादी करोगी?” यहाँ एक सपना साकार हुआ जो मैंने किशोरावस्था से देखा था। हम खुशी-खुशी शादीशुदा थे और मैंने अपना जीवन एक प्रशंसनीय प्रशंसक से एक समर्पित पत्नी के रूप में शुरू किया। मुझे इस महान इंसान के विभिन्न पहलू और गुण देखने को मिले। वह ऐसे किसी भी व्यक्ति से भिन्न था, जिससे मैं कभी मिला हूँ—- एक ऐसा व्यक्ति जो शालीन लालित्य की शाही आभा बिखेरता था।’’

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