Raj Khosla हिंदी सिनेमा के एक ऐसे फिल्म मेकर थे, जिन्हे फिल्म मेकिंग से तो प्यार था पर फिल्म इंडस्ट्री से थी नफरत

करीब चार सालों तक गुरूदत्त के साथ काम करने के बाद राज खोसला के डायरेक्शन में पहली फिल्म बनी सीआईडी। जिसमें खुद देव आनंद ही लीड स्टार थे

Raj Khosla Birth Anniversary: हिंदी सिनेमा के बीते हुए पन्नों को पलट कर देखा जाए, तो उनमें एक ऐसा फिल्म मेकर भी मिलेगा, जिसने अपनी फिल्मों से अभिनेत्रियों को एक अलग पहचान दिलाई थी। उस फिल्म मेकर का नाम है राज खोसला। 31 मई 1935 को जन्मे राज खोसला बहुत कम उम्र में ही मुंबई संगीतकार सपने का सपना लेकर आए थे। काम की तलाश के दौरान ही राज खोसला की मुलाकात देव आनंद से हुई और देव आनंद के कहने पर वो गुरूदत्त के साथ सहायक डायरेक्टर के तौर पर काम करने लगे। करीब चार सालों तक गुरूदत्त के साथ काम करने के बाद राज खोसला के डायरेक्शन में पहली फिल्म बनी सीआईडी। जिसमें खुद देव आनंद ही लीड स्टार थे और साथ वहीदा रहमान की पहली फिल्म में उन्हे निर्देशित करने का मौका राज खोसला को मिला।

सीआईडी जब रिलीज हुई तो सुपरहिट फिल्म साबित हुई और यहीं से राज खोसला के निर्देशन में बनी फिल्मों की कामयाबी का सिलसिला शुरू हो गया। राज खोसला ने अपनी फिल्मों के जरिए साधना और रोमांटिक गर्ल आशा पारेख को अभिनय के नये मुकाम पर पहुंचा दिया। साधना के साथ वो कौन थी,मेरा साया,अनीता और आशा पारेख के साथ दो बदन जैसी फिल्में बनाकर राज खोसला ने ये साबित कर दिया था कि वो आगे की सोच वाले फिल्म मेकर हैं। निर्देशन के बाद खोसला साहब निर्माता और बाद में वितरक भी बने।

राज खोसला की आखिरी हिट फिल्म अमिताभ बच्चन,शत्रुघ्न सिन्हा और जीनत अमान की लीड भूमिका से सजी फिल्म दोस्ताना 1980 में रिलीज हुई। धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बनी ये फिल्म बेहद ही कामयाब साबित हुई थी। अपने चार दशक के फिल्मी सफर में राज खोसला ने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी। राजेश खन्ना के साथ दो रास्ते और प्रेम कहानी जैसी फिल्में बनाई, जो उनकी लगातार हिट होने वाली फिल्मों में से एक थी। ये तो सच है कि फिल्म मेकिंग और मेकिंग में अलग प्रयोग से राज खोसला को बहुत प्यार था लेकिन वो फिल्म इंडस्ट्री से नफरत करते थे। इस बात का खुलासा महेश भट्ट ने अपने एक इंटरव्यू में एक बार किया था।

महेश भट्ट के मुताबिक फिल्म मेकिंग की कला उन्होने राज खोसला से ही सीखी थी। उन्होने राज खोसला की फिल्म मेरा गांव मेरा देश में बतौर सहायक निर्देशक काम किया था। महेश भट्ट ने कहा कि वो हमारे गुरू थे जिनको न सिर्फ मेकिंग बल्कि संगीत की भी अच्छी समझ थी। राज खोसला फिल्म मेकिंग से जितना प्यार करते थे, इस इंडस्ट्री से उन्हे उतनी ही नफरत थी। वो कहते थे कि यह हारा हुआ खेल है, जहां किसी की जीत नहीं होती। राज खोसला को ही हिंदी सिनेमा में नियो नॉयर तकनीकी इस्तेमाल करने का श्रेय जाता है।

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