Hasrat Jaipuri Rare Lehren Interview: हिंदी सिनेमा के पहले शोमैन राज कपूर के लिए 1949 का साल काफी शानदार रहा था। इस साल शोमैन की चार फिल्में रिलीज हुई थी। जिसमें से पहली सुनहरे दिन तो फ्लॉप साबित हुई थी लेकिन अगली तीन फिल्मों की कामयाबी ने राजकपूर को हिंदी सिनेमा का पहला शोमैन बना दिया था। ये थी परिवर्तन और महबूब खान की 1949 में ही रिलीज हुई फिल्म अंदाज़, जिसमें राजकपूर के साथ नरगिस और दिलीप कुमार भी नजर आए थे। परिवर्तन और अंदाज़ के हिट होने से राज कपूर की शोहरत धीरे धीरे बढ़ने लगी थी और इसके बाद शौमेन की पहली ड्रीम प्रोजेक्ट फिल्म बरसात रिलीज हुई। जिसे खुद शोमैन ने निर्देशित किया और आरके फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस भी किया। फिल्म में जहां राज कपूर और नरगिस व निम्मी के बेमिसाल अदाकारी थी, वहीं शंकर जयकिशन की संगीत और हसरत जयपुरी व शैलेंद्र के लिखे गीतों की खुमारी। इन सभी ने फिल्म को सुपरहिट बना दिया था। फिल्म बरसात के बारे में बात करते हुए हसरत जयपुरी ने लहरें को बताया था कि उनकी राज कपूर से पहली मुलाकात कैसे हुई थी।
हसरत जयपुरी इस बारे में बात करते हुए कहते हैं कि जब उन्हे राज कपूर ने पहली बार बुलाया, तो वो थोड़ा सा नर्वस थे, लेकिन राज कपूर और बाकी टीम के सदस्यों ने जिस तरह से उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, उसने हसरत साहेब को हैरत में डाल दिया था। बहरहाल हसरत ने फिल्म बरसात में धुन सुनकर गाने लिखे और पहला गाना जो लिखा वो था जिया बेकरार है छाई बहार है, ये गाना रिलीज के बाद छा गया, जो निम्मी पर फिल्माया गया था। इसके बाद हसरत ने बरसात फिल्म के दूसरे गाने भी लिखे, जो बेहद ही कामयाब रहे। बस यहीं से हसरत जयपुरी हिंदी सिनेमा के उन अनमोल रत्नों में शामिल हो गए। जिसके बगैर हिंदी सिनेमा के गीतों की कल्पना नहीं की जा सकती है।
गीतकार हसरत जयपुरी ने बताया कि पेट की भूख ने उन्हे जयपुर से मुंबई ला दिया और यहां उन्होने बस कंडक्टर की नौकरी से अपने करियर की शुरूआत की और साथ ही साथ मुशायरा भी करते रहे। ऐसे ही एक मुशायरे में पृथ्वीराज कपूर ने हसरत को सुना, तो उन्होने राज कपूर को इस बारे में बताया और इसके बाद हसरत राज कपूर से मिले और फिर आगे बताने की कोई जरूरत नहीं है। लहरें से बातचीत में हसरत ने ये भी बताया कि उनका असली नाम इकबाल हुसैन है लेकिन शायरी के तखल्लुस ने उन्हे हसरत बना दिया और चूकि वो जयपुर से थे, इसलिए हसरत के आगे जयपुरी जुड़ गया और इस तरह से हसरत जयपुरी हिंदी सिनेमा में छा गया।
हसरत ने कहा कि वो अपने पडोस की एक लड़की से प्यार करते थे। जो अलग धर्म की थी और उसके ही प्यार में हसरत ने शायरी सीखी और प्यार भरे गीत लिखने लगे। हसरत ने ये भी बताया कि फिल्म संगम का मशहूर गाना ये मेरा प्रेमपत्र पढ़कर कहीं नाराज़ ना होना, उन्होने अपने प्यार का इजहार करने के लिए खत में लिखा था। जिसे बाद में फिल्म के गानों में इस्तेमाल किया गया। देखते हैं हसरत जयपुरी का ये अनोखा इंटरव्यू, सिर्फ लहरें पॉडकास्ट पर।

