Womens Day SPL: हिंदी सिनेमा की पहली महिला निर्देशक बन Fatma Begum ने बदली थी सोच

1922 में फिल्म वीर अभिमन्यु से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने वाली एक्ट्रेस फातिमा बेगम को हिंदी सिनेमा की पहली महिला निर्देशक होने का खिताब हासिल है

First In Hindi Cinema On Womens Day: हमारा समाज एक पुरूषवादी समाज है, लेकिन समय समय पर कई ऐसी साहसी महिलाएं सामने आई हैं, जिन्होने पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाते हुए समाज की तरक्की में अहम रोल निभाया है। फिर चाहे वो फिल्मों के निर्माण का क्षेत्र ही क्यों ना हो। एक समय ऐसा था कि जब भारतीय सिनेमा की पहली फिल्म बनने लगी तो उसके लिए कोई भी महिला लीड एक्ट्रेस का किरदार निभाने को तैयार नहीं हुई। थक हार कर राजा हरिश्चंद्र के फिल्म निर्माता दादा साहेब फाल्के ने पुरूष को महिला किरदार के लिए कास्ट किया। पर धीरे धीरे फिल्मों में काम करने के लिए महिलाएं आगे आने लगी।

दादा साहेब फाल्के की दूसरी फिल्म मोहिनी भस्मासुर के लिए दुर्गाबाई कामत तैयार हुई औऱ हिंदी सिनेमा की पहली महिला एक्ट्रेस होने का खिताब हासिल किया। ठीक इसी तरह एक्ट्रेस नरगिस की मां जद्दनबाई को हिंदी सिनेमा का पहला महिला संगीतकार होने का गौरव हासिल हुआ। जिन्होने तलाश-ए-हक और मैडम फैशन के लिए संगीत दिया। इसी तरह जब फिल्म निर्देशन के क्षेत्र की बात होती हैं, तो यहां भी महिलाएं किसी से पीछे नहीं हैं। 1922 में फिल्म वीर अभिमन्यु से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने वाली एक्ट्रेस फातिमा बेगम को हिंदी सिनेमा की पहली महिला निर्देशक होने का खिताब हासिल है।

फातिमा बेगम ने 1926 में बनी फिल्म बुलबुल-ए-परिस्तान की पहले पटकथा लिखी और बाद में इस फिल्म को निर्देशित करने का जिम्मा मिला। जिसको फातिमा ने पूरा किया। फातिमा बेगम ने खुद की फिल्म कंपनी फातमा फिल्म्स स्थापित कर कई फिल्मों का निर्माण किया और बतौर निर्देशक कामयाबी पाई। इनकी चुनिंदा फिल्मों में गॉडेस ऑफ लव,चंद्रावली,हीर रांझा और शकुंतला शामिल है।

फातिमा बेगम के बाद नूतन की मां और अपने जमाने की मशूहर अभिनेत्री शोभना सामर्थ ने हमारी बेटी और छबीली जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। बात अगर दूसरी महिला फिल्म निर्देशकों की करें, तो उनमें सई परांपजे,अरूणा राजे,टीपी राजलक्ष्मी,साधना,तब्बसुम,हेमामालिनी,नीलिमा अजीम,सोनी राजदान,नंदिता दास और पूजा भट्ट का नाम भी शामिल हैं। जिन्होने कई शानदार फिल्में निर्देशित की हैं।

पिछले दो से तीन दशकों की बात करें, तो विजया मेहता,अपर्णा सेन,दीपा मेहता,कल्पना लाजमी,मीरा नायर, गुरविदंर चड्ढा, फराह खान, तनुजा चंद्रा, विंटा नंदा, लीना यादव, जोया अख्तर, किरण राव, सोहना उर्वशी, मेघना गुलजार, रीमा राकेशनाथ, बेला नेगी, जेनिफर लिंच, सौंदर्य रजनीकांत, लवलीन टंडन,अनुषा रिजवी, रीमा कागती और गौरी शिंदे के नाम उभर कर आते हैं। जिन्होने बतौर निर्देशक अपनी छाप छोड़ी है। इसके अलावा मौजूदा दौर के मशहूर महिला निर्देशकों में फराह खान का नाम भी आता है। जिन्होने कई जोनर की कामयाब फिल्में बनाई हैं।

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