Raj Kapoor की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘आवारा’ की वजह से Sanjay Khan ने चुना था अभिनय का रास्ता

Raj Kapoor-Sanjay Khan: गुजरे जमाने के बेमिसाल अदाकार संजय खान को आज की पीढ़ी उतना नहीं जानती, पर एक जमाना था जब हिंदी सिनेमा में सिर्फ दो खूबसूरत भाइयों का बोलबाला था। एक थे हैंडसम काऊ ब्वॉय के नाम से मशहूर फिरोज़ ख़ान और दूसरे संजय खान। 3 जनवरी 1941 को पैदा हुए अभिनेता संजय खान अब करीब 82 के हो चुके हैं। संजय खान का नाम ज़ेहन में आते ही उनके रहस्य और रोमांच वाली फिल्में सामने आ जाती हैं। संजय खान का पूरा नाम शाह अब्बास अली खान है, लेकिन फिल्मों में वो संजय खान के नाम से जाने जाते हैं।

कहते हैं 12 साल की उम्र में संजय खान राज कपूर की फिल्म आवारा देखने थियटर में गए, तो संजय खान को आवारा इतनी पसंद आ गई कि तुरंत उन्होने इस फिल्म के कलाकारों से मिलने का फैसला किया। और ये भी फैसला कर लिया कि बड़े होकर वो भी फिल्में ही बनाएंगे। आगे चलकर ऐसा हुआ भी। 1964 में संजय खान को चेतन आनंद की फिल्म हक़ीक़त में एक छोटा सा किरदार किया। इसके बाद फिल्म दोस्ती में सहायक भूमिका अदा की।

फिर 1966 में रिलीज फिल्म दस लाख से संजय खान बतौर लीड भूमिका में नजर आए। फिल्म हिट हो गई, इसके बाद संजय खान ने एक फूल दो माली, इंतकाम, मेला, उपासना, धुंध, और नागिन जैसी फिल्में की। अभिनय की बारीकी सीखने के बाद संजय खान ने 1977 में चांदी सोना नाम की फिल्म से अदाकारी के साथ ही साथ निर्देशन की कमान भी संभाली। और इसे लेकर 3 फिल्मों को डायरेक्शन किया जिनमें अब्दुल्ला और काला धंधा गोरे लोग जैसी फिल्में शामिल हैं।

बिग स्क्रीन के साथ ही 80 के दशक में संजय खान ने छोटे परदे का रूख किया और टीपू सुल्तान, ग्रेट मराठा और जय हनुमान जैसे सफल धारावाहिकों का निर्माण किया। ‘द स्वार्ड ऑफ टीपू सुल्तान’ की शूटिंग के दौरान एक जानलेवा हादसे हुआ था। जिसमें कई लोग मारे गए थे। सेट पर लगी भयंकर आग की चपेट में खुद संजय खान भी आ गए थे।

कहते हैं कि महीनों संजय खान अस्पताल में भर्ती रहे और इस दौरान दर्दनांक पीड़ा व कई सर्जरीज से उन्हे गुजरना पड़ा। संजय खान आज फिल्मों में नहीं लेकिन कभी कभार किसी पार्टी वगैरह में नजर आ जाते हैं।

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