हिंदी सिनेमा को कई क्लासिक देने वाले Music Maestro Naushad ने जब नये जमाने की फिल्मों में संगीत देने से कर दिया था इनकार

Music Maestro Naushad Exclusive Podcast With Lehren: हिंदी सिनेमा के Legendry Music Maestro Naushad साहब को कई कल्ट क्लासिक फिल्मों में लाजवाब संगीत देने के लिए जाना जाता है। 30 के दशक से नौशाद साहब ने अपने करियर की शुरूआत हिंदी सिनेमा में की थी और 90 के दशक की फिल्मों के लिए संगीत दिया था। पर 90 के दशक में सिनेमा के बदलते दौर और एक्शन फिल्मों के बढ़ते क्रेज ने नौशाद साहब को निराश कर दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि बंदूक के गोलियों की गड़गडाहट के बीच संगीत का कोई काम नहीं है।

Music Maestro Naushad का इनकार:

म्यूजिक मेस्ट्रो नौशाद ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में इस बारे में विस्तार से बातें की हैं। जिसे लहरें पोडकास्ट आपके लिए लेकर आया है। उम्मीद है कि आप नौशाद साहब के इस पोडकास्ट को एंज्वॉय करेंगे। इस पोडकास्ट में नौशाद साहब ने बताया कि वो 1937 से सिनेमा में संगीत दे रहे हैं लेकिन उन्होने कभी कभी संगीत को बिजनेस के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया है। शायद इसीलिए उनकी झोली में कम फिल्में आई हैं, लेकिन इस गम उन्हे नहीं है। नौशाद साहब का मानना है कि जो संगीत मुगलों के जमाने में उनके दरबारों में जंजीरों में कैद था। उसे आजादी के बाद लोगों के बीच लाया गया। ताकि लोग देश के संगीत के रागों से रूबरू हों।

Music Maestro Naushad ने बेटे की फिल्म को दिया संगीत:

Naushad साहब ने आगे कहा कि उनका मन अब फिल्मों में संगीत देने को नहीं करता। इसके लिए उन्होने कई फिल्म मेकरों से माफी मांग ली है कि उनके लायक अब कुछ बचा नहीं है। हालाकि नौशाद साहब ने 90 के दशक में रिलीज फिल्म तेरी पायल मेरे गीत और गुड्डू जैसी फिल्मों को अपने संगीत से सजाया था। तेरी पायल मेरे गीत एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्रि और गोविंदा की लीड भूमिकाओं से सजी थी। जिसे नौशाद साहब के बेटे रहमान नौशाद ने डायरेक्ट किया था। इसके प्रोड्यूसर प्रेम लालवाणी थे। प्रेम लालवाणी ने ही गुड्डू फिल्म को प्रोड्यूस किया था।

Music Maestro Naushad साहब को उनके शानदार संगीत के लिए जाना जाता है। नौशाद अली की सिल्वर जुबली फिल्मों में शारदा, कानून, नमस्ते, संजोग, संयासी, शाहजहां, नाटक, दुलारी जैसी फिल्म शामिल थी जबकि अनोखी अदा, अंदाज़, मेला, आन और कोहिनूर जैसी फिल्में गोल्डेन जुबली और मदर इंडिया, अनमोल घड़ी, मुगल-ए-आजम और रतन जैसी फिल्में डायमंड जुबली थी।

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