Music Composer Dilip Sen Exclusive Interview: हिंदी सिनेमा में संगीतकारों की कई मशहूर जोड़ियां रही हैं। इनमें पंडित हुस्नराम भगतराम से लेकर जतिन ललित व सचेत परंपरा जैसे कई नाम हैं। जिन्होने एक संगीत के सुनने वालों को कई नायाब तोहफे दिए हैं। इन्ही में से एक जोड़ी ने 90 के दशक में अपनी धाक जमाई थी। जिसका नाम है संगीतकार जोड़ी दिलीप सेन समीर सेन। वैसे तो ये चाचा भतीचा का जोड़ी थी, लेकिन दोनों ने एक साथ मिलकर हिंदी सिनेमा को कई शानदार नगमें दिए हैं। जो लोगों के दिलों में आज भी बसे हुए हैं। इस जोड़ी के दिलीप सेन ने एक बार लहरें से खास बातचीत की थी। जिसमें दिलीप सेन ने अपने करियर, यश चोपड़ा पर बात करते हुए संगीतकारों को बड़ी नसीहत भी दी थी। तो चलिए जानते हैं इस बातचीत के कुछ अंश।
दिलीप सेन ने अपनी बातचीत में अपने परिवार के बारे में सबसे पहले बात की थी। इस बातचीत में संगीतकार ने बताया कि उनके पूर्वजों का संबंध कहीं न कहीं संगीत सम्राट तानसेन से रहा है। उनके पिता जमाल सेन भी अपने जमाने के मशहूर संगीतकार रहे हैं। हालाकि दिलीप सेन ने ज्यादा शिक्षा तो हासिल नहीं की, पर संगीत और उसके सातों सुरों के बारे में उनको बहुत जानकारी है। दिलीप सेन ने अपनी जोड़ी अपने भतीजे समीर सेन के साथ बनाया और दोनों ने मिलकर कई शानदार फिल्मों को अपने संगीत के जादू से सजाया और अपने पिता की लीगेसी को आगे बढ़ाया है।
दिलीप सेन बताते हैं कि उन्हे यूं तो सबसे पहला ब्रेक जगदीप ने अपनी फिल्म सूरमा भोपाली में दिया था। जो 1988 में रिलीज हुई थी। इसके बाद संजय दत्त व रवीना टंडन की लीड भूमिका से सजी बड़ी फिल्म जीना मरना तेरे संग का संगीत देने का मौका दिलीप सेन समीर सेन को मिला। जो 1992 में रिलीज हुई थी। दिलीप सेन बताते हैं कि वो जुल्म की हुकुमत फिल्म के गाने की रिकॉर्डिंग कर रहे थे, तब वहां फिल्म मेकर यश चोपड़ा भी आए हुए थे। जो दिलीप सेन व समीर सेन के संगीत से बहुत प्रभावित हुए और अपने आने वाली दो फिल्मों आईना व ये दिल्लगी के जरिए दिलीप सेन समीर सेन को बड़ा ब्रेक दिया। ये फिल्में हिट रही और दिलीप सेन समीर सेन शोहरत की बुलंदी पर पहुंच गए।
दिलीप सेन ने इस बातचीत में और क्या कुछ कहा है। इसके लिए आपको लहरें पोडकास्ट यूट्यूब चैनल के अलावा नीचे दिए गए लिंक पर जाना पड़ेगा। दिलीप सेन का ये भी कहना है कि कपूर खानदान के बाद फिल्मों में हमारा परिवार ही ऐसा है जिसमें चार पीढ़ियों से म्यूजिक का सफर पीढ़ी दर पीढ़ी चल रहा है।

