Manoj Kumar Shares His Breakthrough Story: अभिनेता मनोज कुमार का असली नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था। विभाजन के बाद जब मनोज कुमार का परिवार दिल्ली आया, तो वो शुरू में रिफ्यूजी कैंप में रहे। बाद में हिंदू कॉलेज से पढ़ाई की और नाटक भी करते रहे। बचपन से ही फिल्मों का शौक था। एक बार उनके एक रिश्तेदार लेखराज भाकड़ी, जो फिल्में उस समय बनाते थे, मनोज कुमार के घर आए और मनोज कुमार को देखकर इंप्रेस हुए, बोले फिल्मों में कुछ करना चाहते हो, तो मुंबई आ जाओ।
मनोज कुमार ने 1949 में प्रदर्शित फिल्म ‘शबनम’ देखी, तो नायक दिलीप कुमार के किरदार का नाम मनोज उन्हें इतना पसंद आया कि वह मनोज कुमार बन गये। मुंबई पहुंचने पर फिल्मकार भाकड़ी ने मनोज को सबसे पहले 1957 में अपनी फिल्म ‘फैशन’ और फिर कुछ अन्य फिल्मों में छोटी भूमिकाएं दीं, लेकिन वह नायक नहीं बन पा रहे थे। इस बारे में मनोज कुमार ने लहरें से बातचीत में बताया था कि वो रंजीत स्टूडियो में अपने दोस्त के साथ अक्सर आया करते थे। वहीं एक दिन दादामुनी अशोक कुमार के एक फिल्म की शूटिंग थी। पर उनका संवाद तैयार नहीं था। ऐसे में जमीन और आसमान फिल्म की शूटिंग रूक गई थी, क्योकि प्रोड्यूसर को सीन पसंद नहीं था और लेखक मिल नहीं रहा था। फिर राजन साहब ने मनोज कुमार से उस सीन को लिखवाया, जो अशोक कुमार को बहुत पसंद आया।
अशोक कुमार ने फिर मनोज कुमार को हीरो बनने का आशीर्वाद दिया। इसके बाद धीरे धीरे काम मिलने का सिलसिला शुरू हो गया। फिल्मिस्तान की फिल्म पिकनिक व दूसरी फिल्म कांच की गुड़िया में हीरो साइन हुए और भी कई फिल्में उन्हे मिली। मनोज कुमार की लाइफ में उस वक्त नयामोड आया जब वो विजय भट्ट के भाई की फिल्म रेश्मी रूमाल की फिल्म में काम कर रहे थे। रेश्मी रूमाल के सीन्स को देखकर फिर विजय भट्ट ने अपनी फिल्म हरियाली और रास्ता में बतौर हीरो 11 हजार रूपये में साइन किया। फिल्म रिलीज हुई और सुपरहिट साबित हुई। भारत कुमार भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हमें हमेशा आती रहेगी। तो देखते हैं मनोज कुमार का ये यादगार इंटरव्यू।

