Saira Banu Reveals Dilip Kumar Used To Call Her By This Funny Name: सायरा बानो का शुमार हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में होता है। जिन्होने 60 और 70 के दशक में अपनी खूबसूरती और एक्टिंग से लोगों का मनमोह लिया था। सायरा बानों ने रिबेल स्टार शम्मी कपूर के अपोजिट अपने करियर की शुरूआत फिल्म जंगली से की थी। 1961 में रिलीज इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की थी। इसके बाद आई मिलन की बेला,शागिर्द,ब्लफमास्टर,बैराग,सगीना और पड़ोसन जैसी शानदार फिल्में सायरा बानो ने की और शादी के बाद धीरे धीरे फिल्मों से दूरी बना ली। ये तो हम सभी जानते हैं कि सायरा बानो ने हिंदी सिनेमा के थेस्पियन कहे जाने वाले दिलीप कुमार से शादी की थी।
हालाकि शादी के वक्त दोनों की उम्र में दोगुने का फसला था फिर भी सायरा दिलीप साहब के साथ हर मोड पर साए की तरह रही और दोनों के बीच प्यार कभी कम नहीं हुआ। दिलीप कुमार के निधन के बाद भी अपने साहिब के लिए सायरा के दिल में प्यार कम नहीं हुआ है। तभी तो दिलीप कुमार की तीसरी बरसी पर सायरा ने अपने सोशल मीडिया पर दिल को छु लेनी वाली पोस्ट फैन्स के नाम साझा की हैं। जिसमें जरिए एक्ट्रेस ने अपनी पति दिलीप साहब के साथ गुजारे पलों और कुछ ऐसी बातों का भी जिक्र किया है। जिसे आज हर कोई नहीं जानता। सायरा ने इस नोट में ये भी खुलासा किया है कि दिलीप साहब प्यार से उन्हे क्या क्या बुलाते थे।
सायरा बानो ने लिखा है कि मैं उनके सभी प्रशंसकों और शुभचिंतकों, सबसे प्यारे दोस्तों और परिवार को धन्यवाद देने के लिए यह नोट लिखकर अपना प्यार व्यक्त कर रही हूं, जो समय समय पर हमें प्यारे संदेश भेजने का कष्ट उठाते हैं। मुझे खुशी है कि वे सभी हमारी महत्वपूर्ण तारीखों को याद करते हैं और उसके बाद उनकी भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं क्योंकि दिलीप साहब छह पीढ़ियों के अभिनेताओं के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा हैं।
साहब भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू साहब, अटल बिहारी वाजपेयी साहब, नरसिम्हा राव साहब के साथ-साथ प्रमुख वकीलों, अर्थशास्त्रियों और उद्योगपतियों आदि के सबसे अच्छे दोस्त रहे हैं। वह खिलाड़ियों के कट्टर समर्थक रहे हैं, उन्होंने फुटबॉल और क्रिकेट बहुत आसानी से खेला है। वास्तव में वह राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनना चाहते थे न कि नियति ने उनके लिए जो लिखा था। आप देखिए, साहब सर्वकालिक महान अभिनेता थे। उनके पास हर चीज़ उपलब्ध थी, फिर भी बहुत से लोग नहीं जानते कि वे गंभीर अनिद्रा से पीड़ित थे। हमारी शादी से पहले, गोलियाँ लेने के बाद भी, वो सुबह तक जागते रहते थे। हालाँकि, एक बार जब हमारी शादी हो गई और हम एक-दूसरे के लिए अपरिहार्य हो गए, तो उन्होने समय पर सोना शुरू कर दिया। उन्होंने मुझे एक प्यारा सा उपनाम भी दिया, जिसमें प्यार से कहा कि, “सायरा, तुम मेरी नींद की गोली हो, तुम मेरा तकिया हो।” वह जिस आकर्षण के साथ यह बात कहते थे, उसे याद करके मैं आज भी हंस-हंसकर लोट-पोट हो जाती हूं।
सायरा ने आगे लिखा है कि एक और यादगार घटना थी जब उन्होंने मुझे एक नोट लिखा। उन्हें संगीत का बहुत शौक था और अक्सर हमारे घर में पूरा दरबार लग जाता था, जो कलाकारों द्वारा रचे गए जादू का गवाह होता था। साहब, इतनी कुशलता से अक्सर कुछ नींद लेने के लिए दरबार से निकल जाते थे। ऐसी ही एक शाम को छिपकर भागने के बावजूद, उन्होने खुद को मेरे बिना सोने में असमर्थ पाया। तो उन्होंने एक नोट लिखा, “नींद आ रही है, आप क्या सुझाव देती हैं, आंटी? …आपका 100%”। वह मौज-मस्ती करने वाले व्यक्ति थे, हमेशा मुझे ‘आंटी’ कहते थे और हंसते थे। फिर भी, मज़ाक, हँसी और उन हार्दिक नोट्स के पीछे शुद्ध प्रेम था। दिलीप साहब हमेशा के लिए हैं…अल्लाह उन्हें अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखे…आमीन!

