जब Hukumat की शूटिंग के वक्त Sadashiv Amrapurkar घोड़े से इतना डर गए थे कि निर्देशक को मजबूरन बदलना पड़ गया था वो सीन..

अर्द्ध सत्य जैसी फिल्म करने के बाद सदाशिव अमरापुरकर ने अपने अभिनय से सभी के दिलों में जगह बना ली थी

Sadashiv Amrapurkar A Journey in Cinema and Family Insights: फिल्म अभिनेता सदाशिव अमरापुरकर हिंदी सिनेमा के सबसे वर्सेटाइल एक्टर्स में से एक थे। 80 के दशक के शुरूआती दौर में सदाशिव अमरापुरकर ने गोविंद निहलानी की फिल्म अर्द्ध सत्य में एक राजनेता का दमदार किरदार निभाया और हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाई। इसके बाद सड़क व दूसरी फिल्मों में महारानी जैसे आउकॉनिक किरदार कर खलनायकी की दुनिया का बेताज बादशाह बन गए। हालाकि अमरापुरकर ने अपनी पूरे फिल्म करियर के दौरान खलनायकी के अलावा चरित्र किरदारों में भी हाथ अजमाया था और कई फिल्मों में अपनी कॉमिक सेंस ने लोगों का दिल जीता था।

सदाशिव अमरापुरकर की बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर आइए जानते हैं कि अभिनेता की लाइफ से जुड़े कुछ अनसुनी कहानियों को, जिसे खुद एक फ्लैशबैक इंटरव्यू में अभिनेता सदाशिव अमरापुरकर बताया था। लहरें रेट्रो से खास बातचीत करते हुए सदाशिव अमरापुरकर ने अर्द्ध सत्य में काम मिलने का वाक्या भी बताया और कहा कि कई फिल्मों के लिए फिल्म लेखक विजय तेंदुलकर ने उनकी सिफारिश की थी। अर्द्ध सत्य जैसी फिल्म करने के बाद सदाशिव अमरापुरकर ने अपने अभिनय से सभी के दिलों में जगह बना ली थी। वो विनोद तेंदुलकर ही थे जिन्होने अर्द्ध सत्य की कहानी भी लिखी थी। इन्होने ही रामा शेट्टी के रोल के लिए सिफारिश की थी और ये भी कहा था कि उनकी सिफारिश बहुत ही कम कामयाब होती है।

इस बातचीत में अभिनेता ने ये भी बताया कि फिल्मों के सेट से घर आने के बाद वो बिल्कुल सामान्य इंसान बन जाते हैं। फिल्मों में काम करना सिर्फ आठ से नौ घंटे तक रहता है। जब तक वो शूटिंग करते हैं। वो एक आम इंसान की तरह हैं। इसके अलााव अभी तक उन्होने अपनी बहुत कम ही फिल्में देखी हैं। जिसमें सड़क,हुकुमत आदि ही देखी है। सदाशिव ने ये भी कहा कि 25 साल काम करने के बाद लोग उनके काम को लेकर किस तरह से रिएक्टर करेंगे। उसका अंदाज़ा उन्हे पहले ही हो जाता है। इसलिए उन्होने एक्टिंग के वक्त ठंडे दिमाग से काम करते हैं ताकि दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतर सके। एक्टर ने ये भी कहा कि मेरी बेटियों डर जाती हैं जब मैं फिल्मों में हीरो से मार खाता हूं।

इसके अलावा अमरापुरकर ने कहा कि आर्ट फिल्म की अपेक्षा कॉमर्शियल फिल्मों में काम करना बहुत चैलेंजिंग है। आर्ट फिल्मों में काम करके हर किसी को खुश किया जा सकता है। जबकि कॉमर्शियल फिल्मों में करके हर एक इंसान को खुश करना बहुत मुश्किल होता है। आम दर्शकों को उसको हिसाब से ही फिल्में चाहिए, उन्हे बुद्धिजीवियों की तरह की फिल्में नहीं चाहिए होती हैं। घर में अमरापुरकर बहुत सिंपल रहते हैं वो वेजीटेरियन हैं और डर सिर्फ एक बात से है कि वो घोड़े से बहुत परेशानी होती हैं और ये डर उन्हे घोड़े पर फिल्म हुकुमत की शूटिंग करते वक्त हुए एक हादसे से हुआ था। लहरें रेट्रो पर सदाशिव अमरापुरकर का ये पूरा इंटरव्यू देख सकते हैं।

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