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Andhra Pradesh के गरीब व्यक्ति का घर बनाने का सपना हुआ खराब, दीमक ने चट किए 5 लाख रुपये

आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के एक व्‍यक्ति ने देखा था। उसे पूरा करने के लिए उसने पांच लाख रुपये जोड़कर रखे थे। ये रुपये उसने घर पर ही एक संदूक के अंदर प्‍लास्टिक के बैग में रखे। लेकिन जब उसने काफी समय बाद उन रुपयों को देखा तो उसके होश उड़ गए।


Andhra Pradesh Person’s Incident: आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh) के एक व्यक्ति के साथ हुए घटना को सुन आपकी भी आंखे नम हो जाएंगी। आपने देखा होगा आमतौर पर हर इंसान अपने मेहनत के पैसे से घर बनाना चाहता है। जिसके लिए हर इंसान कड़ी मेहनत कर दिन-रात पैसे कमाने के लिए मेहनत करता है। एक-एक पैसे जमा कर अपने सपनों का घर बनाने के लिए अमीर-गरीब सभी मेहनत करते है।

ऐसा ही एक सपना आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के एक व्‍यक्ति ने देखा था। उसे पूरा करने के लिए उसने पांच लाख रुपये जोड़कर रखे थे। ये रुपये उसने घर पर ही एक संदूक के अंदर प्‍लास्टिक के बैग में रखे। लेकिन जब उसने काफी समय बाद उन रुपयों को देखा तो उसके होश उड़ गए। उसके ये रुपये दीमक (Termites) चट कर गए।

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ये घटना आंध्र प्रदेश के कृष्‍णा जिले के मइलावरम में रहने वाले जमालया के साथ हुआ है। जमालया का उस गांव में एक मांस बेचने का दूकान है। उसने अपने सपनों का घर बनाने के लिए पिछले कुछ दिनों से पैसे जोड़ना शुरू कर दिया था। पैसे वह एक संदूक के अंदर प्लास्टिक में डालकर रखता था। लेकिन बीते कुछ महीनों से उसने संदूक खोलकर देखा भी नहीं था। हलाकि जब उसने पैसो की हालत देखि तो उसके होश उड़ गए।

वही रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस अफसर ने बताया की 2020 में इलाके में काफी बारिश हुई थी। ऐसे में उस मौसम में दीमक पैदा होती हैं. यही जमालया के साथ हुआ। उसके घर पर रखे संदूक में दीमक लग गई. इस दीमक ने सारे नोट खराब कर दिए। जमालया गरीब है। उसे दीमक द्वारा रुपये नष्‍ट करने की जानकारी पिछले हफ्ते तब हुई, जब वो किसी का कर्ज चुकाने के लिए उन रुपयों से कुछ रुपये निकालने गया।

संदूक खोलते ही उसे और उसके परिवार के होश उड़ गए। दीमक सभी नोटों को नष्‍ट कर चुकी थी. इसके बाद उसके परिवार वाले दुखी हो गए। उसके पास रखे नोट में 500, 200, 100, 20 और 10 रुपये के नोट शामिल थे। इसके बाद जमालया की हालत को देखकर बैंक ऑफ बड़ौदा के अफसर आगे आए। उन्‍होंने इन रुपयों का पंचनामा कर रिजर्व बैंक को भेजने की बात कहीं है। उसी के बाद तय हो पाएगा कि किस तरह की सहायता उपलब्‍ध हो सकती है।

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