Ajit का बतौर Hero नहीं चल रहा था सिक्का, ऐसे में दोस्त Rajendra Kumar की एक सलाह ने एक्टर को बना दिया सबसे खौफनाक विलेन

हिंदी सिनेमा में अजीत के नाम से मशहूर अभिनेता ने बतौर हीरो अपने करियर की शुरूआत की थी, पर कामयाब नहीं हो पा रहे थे। ऐसे में राजेंद्र कुमार की एक सलाह ने उन्हे हिंदी सिनेमा का मशहूर विलेन बना दिया

How Ajit Became Bollywood’s Most Famous Villain: हिंदी सिनेमा में अभिनेता अजीत ने अपनी पहचान एक खलनायक के तौर पर बनाई और इसी विधा में अजीत को प्रसिद्धि भी मिली, लेकिन अजीत ने अपने करियर की शुरूआत हिंदी सिनेमा में बतौर हीरो की थी। जानकारी के मुताबिक करीब 90 फिल्मों में लीड हीरो का किरदार करने के बावजूद अजीत को बतौर हीरो पहचान नहीं मिल पाई। इनमें करीब 15 फिल्में अजीत ने नलिनी जयवंत के साथ की थी। 40 के दशक का दौर अजीत के लिए कोई खास कामयाबी नहीं दिला पाया। फिर अजीत ने नाना भाई भट्ट के कहने पर अपना नाम हामिद अली खान ने अजीत रखा और इसके बाद बतौर हीरो कुछ फिल्में कामयाब हुई। इनमें मधुबाला के अपोजिट 1950 में रिलीज हुई फिल्म बेकसूर भी शामिल थी।

इसके बाद नास्तिक,बड़ा भाई,मिलन,बारादरी फिर नया दौर व मुगल-ए-आजम में अजीत बतौर सहायक कलाकार के तौर पर नजर आए। इस बारे में लहरें को दिए एक फ्लैशबैक इंटरव्यू में अजीत ने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा था कि उनकी बतौर हीरो नाकामयाबी के पीछे सबसे बड़ी वजह ये थे कि उनका चेहरा हीरो जैसा नहीं था और दूसरा को हीरोइन्स के साथ पेड़ों के ईर्द गिर्द गाना नहीं गा सकते थे। फिल्मों में करीब दो दशक बीत जाने के बाद उनके सबसे अच्छे दोस्तों में से एक राजेंद्र कुमार ने फिल्म सूरज के लिए अजीत को विलेन का ऑफर किया और कहा कि देखों तुमने सारी आजमाइशे कर ली हैं और अब ये भी करके देखों। मुझे लगता है कि तुम इसमें कामयाब जरूर होगे।

राजेंद्र कुमार की सलाह पर फिर अजीत ने अमल किया और सूरज में वो बतौर विलेन तलवारबाजी करते नजर आए। ये फिल्म जबरदस्त कामयाब रही और अजीत को भी विलेन के रूप में लोगों ने पसंद किया और बस यहीं से हिंदी सिनेमा का एक सीधा सादा हीरो विलेन में तब्दील हो गया। सूरज के बाद अजीत की सबसे बड़ी हिट फिल्म जंजीर साबित हुई। जिसमें वो अमिताभ बच्चन,प्राण व जया बच्चन के साथ नजर आए थे। इसके बाद तो यादों की बारात,कालीचरण जैसी कई कामयाब फिल्मों में अजीत ने अपना सिक्का जमाया और बतौर विलेन शोहरत की बुलंदी पर पहुंच गए। अजीत की कामयाबी के बाद कुछ लोगों ने उनसे मजाक में ये भी कहा कि इसने हमारा काम छीन लिया।

1984 में राज तिलक की रिलीज के बाद अजीत ने फिल्मों से थोड़ी दूरी बना ली थी। पर फिर 90 के दशक में अजय देवगन की फिल्म जिगर से चरित्र किरदार के रूप में वापसी की और इस फिल्म में वो हीरो को कराटे की ट्रेनिंग देते नजर आते हैं। अजीत की फिल्मों में उनके बोले संवाद लोगों के बीच में काफी मशहूर हुए थे और उनपर कोई जोक्स भी बने थे। अजीत की 1995 में रिलीज फिल्म क्रिमिनल आखिरी फिल्म थी। इसके बाद 1998 में दिल का दौरा पड़ने से अभिनेता का निधन हो गया। अजीत आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, पर वो अपनी फिल्मों के जरिए लोगों के दिलों में हमेशा बसे रहेंगे।

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