Amitabh Bachchan की Sharaabi के 40 साल पूरे, बाप बेटे के रिश्तों पर बेस Prakash Mehra की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म

अमिताभ बच्चन ने चोटिल हाथ होने के बावजूद जिस शिद्दत के साथ फिल्म पूरी की वो भी काबिल-ए-तारीफ है। अब इस फिल्म की रिलीज के 40 साल पूरे हो गए हैं

Amitabh Bachchan’s Sharaabi Celebrates 40 Years Since Release: ये मई का ही महीना था, जब जेठ की चिलमिलाती गर्मियों में 18 मई 1984 को प्रकाश मेहरा की फिल्म शराबी रिलीज हुई थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन लीड रोल में थे। जबकि दीपक पराशर,ओम प्रकाश,प्राण और जया प्रदा सहायक भूमिकाओं में थी। देखा जाए,तो ये फिल्म जहां सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की बेहतरीन अदाकारी, कादर खान के लिखे उम्दा संवाद, प्राण साहब की पिता की सशक्त भूमिका, बप्पी लहरी और गीतकार अंजान के लाजवाब गीत व संगीत के लिए जानी जाती है। फिल्म ने कई पुरस्कार भी जीते और अमिताभ बच्चन ने चोटिल हाथ होने के बावजूद जिस शिद्दत के साथ फिल्म पूरी की वो भी काबिल-ए-तारीफ है। अब इस फिल्म की रिलीज के 40 साल पूरे हो गए हैं।

अमिताभ बच्चन की चोट बन गया स्टाइल:

इस फिल्म के अधिकतर सीन्स में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का बायां हाथ अक्सर पैंट की जेब में होता है। जो फिल्म की रिलीज के बाद स्टाइल बन गया था। दरअसल सदी के महानायक ने इस फिल्म की शूटिंग के लिए मजबूरी में बायां हाथ पैंट की जेब में डाला था। क्योंकि सदी के महानायक दीवाली के दौरान पटाखे फोड़ते वक्त जल गए थे। जिससे की उनका बायां हाथ जख्मी हो गया था। इसलिए हाथ की चोट को छिपाने के लिए उस वक्त ये तरकीब निकाली गई थी। ताकि फिल्म की शूटिंग समय पर पूरी की जा सके और मेकर्स का ज्यादा नुकसान न हो। इस बारे में बिग बी भी कई बार बोल चुके हैं और जया प्रदा ने एक रिएलटी शो में इस बात का जिक्र कर सीनियर बच्चन की जमकर तारीफ की थी।

बाप बेटे के रिश्ते पर बनी थी फिल्म:

जानकारी के मुताबिक प्रकाश मेहरा के साथ अमिताभ बच्चन ने ज़ंजीर, हेरा-फेरी, ख़ून पसीना, मुक़द्दर का सिकंदर, लावारिस और नमक हलाल जैसी फिल्में कर चुके थे और वो बाप बेटे के रिश्ते पर बेस फिल्म बनाना चाहते थे। शराबी फिल्म की नींव विदेश जाते वक्त पड़ी थी। यह एक ऐसे शख्स की कहानी थी। जो बाप के प्यार के बगैर पलता है। बाप के लिए पैसा ही सबकुछ होता है और इसी कोशिश में वो बेटे पर ध्यान नहीं दे पाता और बेटा शराबी बन जाता है। बेटा हालाकि शराबी होता है पर उसे अच्छे बुरे का ज्ञान हमेशा रहता है। वो हमेशा गरीबों की मदद करता है और शायद इसीलिए शराबी होने के बावजूद लोगों का प्यारा बन जाता है। पिता के रोल में प्राण साहब ने लाजवाब अदाकारी की थी। तो वहीं ओमप्रकाश और जया प्रदा का रोल भी काफी अच्छा था। कहानी बड़ी सीधी साधी थी, पर अकेले दम पर सदी के महानायक ने इस फिल्म को हिट बना दिया था।

बप्पी लहरी और अंजान का जादू:

कहते हैं किसी भी फिल्म को हिट करने में गीत और संगीत का रोल काफी अहम होता है। शराबी को हिट कराने में जहां कादर खान द्वारा लिखे दिल को छू लेने वाले संवाद थे। वहीं अंजान के बोलों को जब बप्पी लहरी ने अपने संगीत की धुनों से सजाया, तो वो लोगों के दिलों में सीधे बस गए। फिर चाहे हो इंतिहा हो गई हो या फिर दे दे प्यार दे और मंजिले अपनी जगह हैं। कहते हैं कि इंतिहा हो गई गाने को किशोर दा ने शराबी की फीलिंग देने के लिए टेबल पर लेटकर गाया था। एक सीन में कादर खान का संवाद कुछ यूं था जिसे अमिताभ बच्चन कहते हैं कि आपने मुझे वो सब कुछ दिया जिसे बाज़ार से ख़रीद कर घर में सजाया जा सकता है. मगर वो सुख नहीं दिया जिसे दिल में सजाया जा सके। इसके अलावा इस फिल्म का एक और संवाद मशहूर हुआ था। मूछे हो तो नथ्थूलाल जैसी नहीं तो हो ही नहीं..अभिनेता मुकरी को देखकर बिग बिग फिल्म में बोलते हैं।

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