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Corona महामारी पर Siddhant Chaturvedi ने लिखा इमोशनल कविता, जिसे पढ़कर छलक जाएंगे आपके आंसू

सिद्धांत चतुर्वेदी (Siddhant Chaturvedi) ने कोरोना महामारी को देखते हुए एक इमोशनल कविता लिखा है। जिसपर फैंस से लेकर कई बड़े बॉलीवुड सेलिब्रिटीज भी रियेक्ट कर रहे हैं।


Siddhant Chaturvedi Recites emotional poem corona cases situation india: 2019 में आई फिल्म ‘गली बॉय’ ऐक्टर सिद्धांत चतुर्वेदी (Siddhant Chaturvedi) अपनी एक्टिंग से सबका दिल जितने में कामयाब रहे थे। उनकी एक्टिंग ने लोगों के दिलों में एक अलग ही छाप छोड़ी। वही अब सिद्धार्थ अपने कलम का भी जादू दिखाते नजर आ रहे है। दरअसल इन दिनों देश में कोरोना वायरस का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। वही देश में कोरोना महामारी से जिस तरह के हालात बनते जा रहे हैं, उससे परेशान होकर सिद्धांत ने एक कविता शेयर की है। उसका शीर्षक है- गुजरती एम्ब्युलेंस। सिद्धांत की इस कविता पर कई बड़े सेलेब्स ने भी रिएक्शन दिया है।

सिद्धांत की इस कविता पर दीया मिर्जा, कृति सैनन, फरहान अख्तर, सैयामी खेर जैसे बड़े सितारों ने रिऐक्शन दिया है। हालांकि बता दें कि ऐसा नहीं कि सिद्धांत ने पहली बार ऐसी कोई कविता कोरोना को लेकर शेयर की हो। पिछले साल भी लॉकडाउन के दौरान उन्होंने दिल को छू जाने वाली एक शानदार कविता शेयर की थी। जिसे भी खूब पसंद किया गया था। और अब ये कविता भी लोगों को खूब पसंद आ रही है।

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Siddhant Chaturvedi Recites emotional poem corona cases situation in india

यहाँ पढ़ें सिद्धांत चतुर्वेदी की इस कविता की पंक्तियां:-

खिड़की पर बैठते ही फिर वही गुजरती हैं एम्ब्युलेंस की आवाजें…

हर सेकंड जैसे कोई अपना आखिरी सांसें ले रहा हो
दिल थोड़ा सहम तो जाता है, भलो वो गुजरता हुआ इंसान अपना भी न हो…

पिछले साल की तरह इस साल शायद वो हौंसला कायम भी न हो
क्योंकि जीत के पहले जो हमने जश्न मनाया था, इस बार जश्न मनाने की कोई वजह भी न हो…

सोचता हूं, क्या करें…बैठे-बैठे चलो घर पे अलमारी सजाते हैं
या फिर कहीं बढ़िया सी जगह छुट्टी मनाते हैं…

इन घटती सांसों से दूर कहीं और हम अपनी सुकून की सांस चुराते हैं

रोजाना बढ़ते बिस्तर की मांगों से बेफिक्र होके हम अपनी चादर फैलाते हैं
ऑनलाइन कपड़े मंगाएं, टिकट कटाएं, सूटकेस निकालें पर…

खिड़की पे बैठते ही फिर वही गुजरती हैं एम्ब्युलेंस की आवाजें
ऐसा लगता है जैसे कोई अपना…

दिल थोड़ा सहम तो जाता है क्योंकि
उस एम्ब्युलेंस का रस्ता मेरे घर के नीचे से होकर भी जाता है!

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