जब शुरु होने के 5 दिन बाद ही बंद हो गई ‘सत्या’, अंडरवर्ल्ड के खौफ से डर गया था प्रोड्यूसर! गुलशन कुमार से जुड़ा मामला

फिल्म 'सत्या' आज भी दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में से एक है। इस फिल्म के माध्यम से मनोज बाजपेयी को इंडस्ट्री में एक ख़ास पहचान मिली थी।

साल 1998 में आई हिंदी सिनेमा की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक ‘सत्या’ आज भी दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में से एक है। यह एक ऐसी फिल्म है जिसने कई अभिनेताओं के कैरियर बनाए जिनमें से मशहूर अभिनेता मनोज बाजपेई का नाम भी शामिल है। जी हां.. फिल्म ‘सत्या’ के किरदार से मनोज बाजपेई को एक बड़ी सफलता हाथ लगी थी लेकिन कहा जाता है कि फिल्म की शूटिंग शुरू होने के 5 दिन के भीतर ही फिल्म का डब्बा बंद हो गया था और इस बात का खुलासा खुद मनोज बाजपेई ने किया। तो चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला?

गुलशन कुमार की हुई थी हत्या
दरअसल हुआ यूं कि, साल 1997 में म्यूजिक प्रोड्यूसर, भजन गायक और मशहूर बिजनेसमैन गुलशन कुमार की हत्या कर दी गई थी। यही वजह थी कि फिल्म सत्या की ओरिजिनल प्रोड्यूसर डर गए थे और उन्होंने अपने हाथ पीछे कर लिया और इस प्रोजेक्ट को बीच में ही छोड़ दिया। हालांकि फिल्म के डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा पीछे नहीं हटे और उन्होंने तय कर लिया था कि वह किसी भी तरह प्रोड्यूसर को ढूंढ निकालेंगे और फिल्म बनाकर ही रहेंगे। अब हाल ही में हुए इंटरव्यू के दौरान मनोज बाजपेई ने सत्या से जुड़ा खुलासा किया।

उन्होंने बताया कि, “जब मुझे सत्या मिली थी मैंने किसी को नहीं बताया था। अपने रूममेट को भी नहीं। मैं हमेशा वहम में रहता था कि फिल्म कैंसिल हो जाएगी, जो कि कुछ दिन के लिए हुआ था। गुलशन कुमार का मर्डर हमारे शूटिंग शुरू करने के 5 दिन बाद हो गया था। फिल्म की शूटिंग रोक दी गई थी, क्योंकि प्रोड्यूसर डर गए थे। गुलशन कुमार का मर्डर इंडस्ट्री का बड़ा हादसा था और हम मुंबई माफिया पर फिल्म बना रहे थे। प्रोड्यूसर डर गया था और उसने फिल्म बंद कर दी थी। हमारे करियर जो अभी शुरू होने ही वाले थे, अचानक थम हो गए थे।’

ऐसे दोबारा बनी फिल्म
मनोज बाजपेयी ने आगे बताया कि, “एक हफ्ते बाद राम गोपाल वर्मा ने भरत शाह को ढूंढ निकाला। और फिर शूटिंग दोबारा शुरू हुई। हमने सत्या को अपना सबकुछ दे दिया था। हम सभी के लिए वो एक हफ्ता बेहद मुश्किल था। हममें से किसी को भी अंदाजा नहीं था कि क्या किया जाना चाहिए। सत्या हमारी आखिरी उम्मीद थी। वो अनिश्चितता बहुत डिप्रेसिंग और परेशान करने वाली थी। मैंने फैसला किया था कि मैं उम्मीद तब तक नहीं छोड़ूंगा जब तक राम गोपाल वर्मा नहीं कहते कि सबकुछ खत्म हो गया है। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वो सिर्फ यही कहते थे कि अब टेंपरेरी रूप से रुके हुए हैं। 8 दिन के बाद हमें गुड न्यूज मिली थी।”

बता दे इस फिल्म के बाद मनोज बाजपेई को करियर में बड़ा मौका हासिल हुआ था। इसके बाद ही वह बॉलीवुड की कई सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा बने और आज भी एक्टिंग की दुनिया से जुड़े हुए हैं।

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