गर्लफ्रेंड बनाने के लिए थियटर से जुड़े थे Saurabh Shukla, ‘सत्या’ से चमकी ऐसी किस्मत फिर हीरो पर भारी पड़े एक्टर!

सौरभ शुक्ला ने शेखर कपूर की फिल्म 'बैंडिट क्वीन' से अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन 'सत्या' फिल्म में उनके किरदार को खूब पसंद किया गया।

सौरभ शुक्ला हिंदी सिनेमा के एक दिग्गज अभिनेता है जो अपनी शानदार एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं। कॉमेडी किरदार से लेकर संजीदा किरदार तक सौरभ शुक्ला ने निभाए हैं और दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं। यूं तो सौरभ शुक्ला को हमेशा ही सपोर्टिंग कैरेक्टर में देखा गया, लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं है कि वह हमेशा ही बड़े-बड़े कलाकारों पर भारी पड़ते हुए नजर आए हैं। आज यानी की 5 मार्च को सौरभ शुक्ला अपना 61 वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं। तो चलिए जानते हैं एक्टर के जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से..

गर्लफ्रेंड के लिए एक्टिंग से जुड़े
5 मार्च 1963 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जन्मे सौरभ शुक्ला ने दिल्ली से अपनी पढ़ाई लिखाई पूरी की। जब उनकी 2 साल की उम्र थी तभी उनका पूरा परिवार दिल्ली में रहने आ गया था। यही वजह है कि उनकी पूरी पढ़ाई लिखाई दिल्ली शहर से ही हुई। सौरभ शुक्ला बचपन से ही एक्टिंग के शौकीन रहे थे। ऐसे में साल 1984 में उन्होंने एक थिएटर ज्वाइन कर लिया। हालांकि वह यहां पर एक्टिंग सीखने नहीं बल्कि गर्लफ्रेंड बनाने आए थे। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि खुद एक इंटरव्यू में सौरभ शुक्ला ने कहा था।

उन्होंने बताया था कि, उन्हें हमेशा ही प्रतिभावन महिलाएं बहुत पसंद रही हैं। मैं अक्सर थिएटर के सामने से गुजरा करता था। वहां बहुत खूबसूरत लड़कियां आती थीं जबकि वहां लड़के उतने अच्छे नहीं थे। मुझे लगा कि यहां मेरा भी चांस लग सकता है।

शेखर कपूर ने दिया पहला ब्रेक
बता दें, सौरभ शुक्ला ने शेखर कपूर की फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ से अपने करियर की शुरुआत की। वह पहली फिल्म से सफल तो नहीं हो पाए लेकिन ‘सत्या’ फिल्म में उनके किरदार को खूब पसंद किया गया और यहीं से वह पहचाने जाने लगे। फिल्म में वह सह -लेखक भी थे। हालाँकि इसके बावजूद अभिनेता को कई दिनों तक काम नहीं मिल पाया था।

एक्टर ने कहा था कि, इस फिल्म के बाद मुझे काम मिलना बंद हो गया था। मुझे 10 साल तक वैसे कमा नहीं मिला जैसा मैं चाहता था। लोग मेरे काम की तारीफें तो करते थे, लेकिन काम नहीं मिलता था। 10 साल मेरे लिए बहुत मुश्किलों भरे रहे हैं। इसके बाद उन्होंने ‘इस रात की सुबह नहीं’, ‘करीब’ ‘जख्म’ ‘जौली एलएलबी’, ‘बर्फी’, ‘ओमजीपीके’, ‘जॉली एलएलबी 2’, ‘रेड’, ‘बाला’ और ‘छलांग’ जैसी फिल्मों से सिनेमाघर में तहलका मचा दिया।

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