हीरो से पहले पुलिस इंस्पेक्टर थे Rajkumar, बेबाक अंदाज से बना लिए थे कई दुश्मन, अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए थे लोग!

राजकुमार को साल 1952 में फिल्म 'रंगीली' मिली जिसमें वह लीड एक्टर के रूप में आए, लेकिन साल 1957 में रिलीज हुई फिल्म 'नौशेरवां-ए-आदिल' से उन्हें इंडस्ट्री में बड़ी सफलता हासिल हुई।

हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता राजकुमार आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है। अपनी शानदार एक्टिंग और बेहतरीन डायलॉग की वजह से राजकुमार ने लोगों के बीच अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। भले ही राजकुमार आज हमारे बीच ना हो लेकिन उनकी फ़िल्में और उनके निभाए गए किरदार दर्शकों के जहन में बसे हुए हैं। आज 3 जुलाई को राजकुमार की पुण्यतिथि है। इस खास मौके पर हम जानेंगे उनके जीवन से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें…

पुलिस नौकरी करते थे राजकुमार
अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर राजकुमार का असली नाम कुलभूषण पंडित था। 8 अक्टूबर 1926 को पाकिस्तान में जन्मे राजकुमार पुलिस की नौकरी किया करते थे और उनका अभिनय की तरफ कोई रुझान नहीं था लेकिन किस्मत ने ऐसा पासा पलटा की वह सीधे बड़े हीरो बनकर उभरे। 40 के दशक में राजकुमार मुंबई आए थे और यहां पर उन्हें सब इंस्पेक्टर की नौकरी मिली थी। उनका स्टाइल और चाल ढाल हीरो की तरह ही था। उनका अंदाज देखकर उनके साथी भी उन्हें अक्सर फिल्मों में काम करने की सलाह देते थे। इसी बीच एक डायरेक्टर ने राजकुमार को अपनी फिल्म में रोल दिया। यह रोल छोटा सा था लेकिन राजकुमार इससे अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे।

इन फिल्मों से मिली पहचान
इसके बाद राजकुमार को साल 1952 में फिल्म ‘रंगीली’ मिली जिसमें वह लीड एक्टर के रूप में आए, लेकिन साल 1957 में रिलीज हुई फिल्म ‘नौशेरवां-ए-आदिल’ से उन्हें इंडस्ट्री में बड़ी सफलता हासिल हुई। इसके बाद इसी बीच ‘मदर इंडिया’ रिलीज हुई जिसमें उन्होंने अपने किरदार से हर किसी का दिल जीत लिया और वह इंडस्ट्री के बेताज बादशाह बन गए। राजकुमार के डायलॉग भी काफी पॉप्युलर है। जैसे कि ‘चिनॉय सेठ, जिनके घर शीशे के बने होते हैं वह दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते..”

इसके अलावा ‘आपके पांव बहुत हसीन है इन्हें जमीन पर मत उतारिएगा मैले हो जाएंगे..” वहीं ‘जानी..’ समेत ऐसे कई डायलॉग है जो आज भी लोगों के बीच मशहूर है। राजकुमार ने अपने करियर में ‘हमराज’, ‘जंगबाज’, ‘नीलकमल’, ‘धर्म कांटा’, ‘इंसानियत के देवता’, ‘हीर रांझा’, ‘पाकीजा’, ‘सौदागर’, ‘तिरंगा’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया।

बेबाक था अंदाज
बता दे राजकुमार अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते थे। वह गोविंदा से लेकर बप्पी लहरी, धर्मेंद्र समते कई कलाकारों को कुछ ऐसा बोल चुके थे जो एक समय पर इनसे किनारा कर चुके थे। हालांकि उनके इस अंदाज से हर कोई वाकिफ था, इसी बीच 3 जुलाई 1996 के दिन राजकुमार इस दुनिया को अलविदा कह गए। बता दें अभिनेता के अंतिम संस्कार में कोई भी शामिल नहीं हुआ था।

दरअसल राजकुमार की ये इच्छा था कि, “जब वो इस दुनिया से जाए तो शांति से विदा हो। अपनी मौत से पहले ही ये कह दिया था कि उनकी अंतिम यात्रा का हिस्सा कोई भी नहीं बनेगा। ना ही उसमें कोई मीडिया शामिल होगी क्योंकि वो अपनी मौत का तमाशा नहीं बनाना चाहते थे।”

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