Hoarding Collapse: बॉलीवुड सितारों ने BMC से पूछा सवाल, तूफान के बाद ही पता चला कि होर्डिंग अवैध था, लोगों की जान की कोई कीमत नहीं

सोनी राजदान ने एक पत्रकार के पेज पर रिट्विट करते हुए लिखा है कि लोगों के मारे जाने के बाद ही बीएमसी को इस अवैध होर्डिंग के बारे में पता क्यों चला

Bollywood Actors React To Ghatkopar Hoarding Collapse: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कल शाम अचानक मौसम बिगड़ने के बाद आए तूफान से काफी नुकसान हुआ है। घाटकोपर इलाके में एक पेट्रोल पंप के बाहर लगे 100 फीट ऊंचे होर्डिंग गिरने से कम से कम 14 लोगों की दुखद मौत हो गई है। जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं और पास के ही अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। हालाकि एनडीआरएफ व बचाव की दूसरी टीमों ने अपने काम को बाखूबी अंजाम दिया है। सरकार के स्तर पर बात की जाए तो केंद्र व राज्य सरकारों ने शोक संदेश के साथ मुवाअजे का ऐलान कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह भी कर दिया है। लेकिन इन 14 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? शायद ही इसका पता चल पाए।

घटना के बाद से ही लोगों में इसे लेकर रोष है कि बीएमसी ने घटना के बाद एक स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा कि ये होर्डिंग बिना उसके परमिशन के लगा था और अवैध था। ऐसे में लोगों को साथ ही साथ अब बॉलीवुड के कुछ सितारे भी बीएमसी से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर आंधी तूफान और लोगों की मौत के बाद ही कैसे पता चला कि होर्डिंग अवैध था और अगर वो अवैध था तो क्या तूफान या फिर लोगों की मौत का इंतजार बीएमसी कर रही थी। इस बारे में एक्ट्रेस आलिया भट्ट की मां सोनी राजदान ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक रिट्विट करते हुए बीएमसी पर सवाल उठाए हैं।

सोनी राजदान ने एक पत्रकार के पेज पर रिट्विट करते हुए लिखा है कि लोगों के मारे जाने के बाद ही बीएमसी को इस अवैध होर्डिंग के बारे में पता क्यों चला? तो क्या @my_bmc इस मामले में अभियोजन के लिए उत्तरदायी नहीं है? ऐसी आपदा घटित होने से पहले उचित कार्रवाई न करने के लिए? इसके अलाव अभिनेता विजय वर्मा ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल से इस घटना की तस्वीर शेयर करते हुए दुख जाहिर किया है। इसके अलावा एक्ट्रेस व होस्ट मिनी माथुर ने भी इस मामले को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया है।

मिनी माथुर ने अपने सोशल मीडिया पर स्टोरी शेयर करते हुए लिखा है कि हमारे देश में जीवन की कोई वैल्यू नहीं है। किसकी होर्डिंग है। किसने यहां लगाने के लिए सालों परमिशन दिया था। ये आरोपो प्रत्यारोपों का खेल अब सप्ताह भर चलता रहेगा लेकिन इसका कोई ठोस जवाब नहीं मिलेगा कि कौन से भ्रष्ट अधिकारियों ने ऐसा करने की परमिशन दी थी और न ही उन पर एक्शन होगा। ये बहुत शर्मनांक है।

जानकारी के मुताबिक इस हादसे में कुछ 88 पीड़ित थे जिसमें से 74 को बचा लिया गया है। जबकि 14 की दुखद मौत हो गई है। राज्य की शिंदे सरकार ने कहा कि वो घायलों का फ्री में इलजा करवाएगी और मृतकों के परिवार को 5 लाख का मुवाअजा दिया जाएगा। पर सवाल वही है कि क्या सरकार इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले पीडित परिवारों को इंसाफ दे पाएगी।

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